गुजरात मंत्रिमंडल विस्तार:गुजरात में नए मंत्रिमंडल के गठन में बीजेपी ने सावधानीपूर्वक जातिगत संतुलन बनाया है। सौराष्ट्र, मध्य, दक्षिण और उत्तर गुजरात में पाटीदार, ओबीसी, एससी और एसटी नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की गई है।
गुजरात मंत्रिमंडल में जातिगत समीकरण का संतुलन, बीजेपी की सटीक राजनीतिक रणनीति
गुजरात में नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में बनी नई टीम में बीजेपी ने जातिगत समीकरण को साधने का प्रयास किया है। पार्टी ने सौरાષ્ટ્ર, मध्य, दक्षिण और उत्तर गुजरात के नेताओं को शामिल कर क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है।
सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र
इस क्षेत्र से कूंवरजी बावळिया, पद्मासिंह चौहाण, वृथाभाई वाघेला, लीला परमार, कीर्ति पटेल, हर्षદ रिबडिया, केतकी ठाकोर, प्रफुल वाघेला जैसे नेताओं को जगह दी गई है। इनमें कानी पटेल, ओबीसी और दलित समुदाय का संतुलन रखा गया है।
मध्य गुजरात
मध्य गुजरात से भूपेंद्र पटेल, अनिरुद्ध वडोद, कांतिलाल दरजी, कविताबेन जडेजा और मनहर वाघेला जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। यहाँ भी कपड़ा पटेल, एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिला है।
दक्षिण गुजरात
दक्षिण गुजरात से भूपेंद्र पाटीदार, कनुभाई देसाई, नरेश पटेल, जयेश गारिया और हेमल पटेल जैसे नेताओं को जगह मिली है। यहाँ लेउवा पटेल, जैन, एसटी और ओबीसी समाज का अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है।
उत्तर गुजरात
उत्तर गुजरात से अमृतभाई पटेल, पी.सी. बारा, प्रभातभाई चौधरी और अन्य नेताओं को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में भी कपड़ा पटेल, एसटी और ओबीसी समाज को प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने राजनीतिक संतुलन बनाया है।
राजनीतिक संदेश
बीजेपी ने इस मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण को संतुलित किया है। पाटीदार, ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल कर पार्टी ने राज्य के सभी सामाजिक वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है।


