दिवाली 2025:बोटाद-जिला के प्रसिद्ध सालंगपुर धाम में काली चौदस के पावन अवसर पर आयोजित विशाल यज्ञ-अन्नकूट में हजारों भक्तों ने भाग लिया। आरती-पूजन के बाद श्रीहनुमानजी को 1 किलो सोने व 350 कैरेट हीरे के जड़ित मुकुट से मुकुटित किया गया, जो इस उत्सव की विशेष आकर्षण रहा।
लोकधर्म और भक्ति की अद्भुत झलक
प्रसिद्ध यात्राधाम सालंगपुर धाम (बोटाद-जिला) में 20 अक्टूबर 2025 को काली चौदस-दिवाली के पावन अवसर पर अत्यंत उल्लासपूर्ण तथा धामधूम से आयोजन हुआ।सुबह से आरंभ हुआ यह पर्व आरती-शृंखला, शृंगार, अभिषेक तथा दोपहर में विशाल अन्नकूट-आरती तथा यज्ञ के माध्यम से पूरा हुआ।
पूजा-विधि व कार्यक्रम
- सुबह 5:30 बजे मंगला आरती से दर्शन प्रारंभ हुए।
- 7:00 बजे शृंगार आरती के बाद 8:00 बजे दादे का अभिषेक हुआ।
- 12:00 बजे छप्पनभोग अन्नकूट आरती सम्पन्न हुई, इसके बाद 12:30 बजे विशाल यज्ञमंडप में समुह मारुति यज्ञ की पूर्णाहुति हुई।
- शाम 4:00 बजे चोपड़ा पूजन (शारदा-पूजन एवं लक्ष्मी-पूजन) भी आयोजित हुआ।
मुकुट-ऐश्वर्य: भक्तों का आकर्षण
इस अवसर पर मंदिर में स्थापित श्रीहनुमानजी के सिंहासन को गुलाब के फूलों से सुसज्जित किया गया और दादे को एक विशिष्ट राजवाड़ी शैली का सोने-हीरे का मुकुट पहनाया गया।विवरण के अनुसार यह मुकुट 1 किलो पक्का सोने का, 350 कैरेट लैब्रॉन डायमंड से जड़ा हुआ, 1.3 फुट ऊँचा तथा 1.6 फुट चौड़ा है।
भक्त-सुविधा तथा आयोजन
मंदिर प्रबंधन एवं संत मण्डल ने भक्तों के लिए आवास-व्यवस्था, भोजन-प्रसाद तथा पार्किंग इत्यादि का उत्तम इंतज़ाम किया।
भक्तों ने स्थल पर आने के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम का लाभ उठाया।
निष्कर्ष
इस प्रकार, सालंगपुर धाम में आयोजित यह धार्मिक उत्सव न केवल भक्ति एवं श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समागम एवं सांस्कृतिक आयोजन का भी सुंदर उदाहरण है। सोने-हीरे के मुकुट से विभूषित श्रीहनुमानजी ने भक्तों के मन में एक सजीव अनुभव अंकित किया है।


